Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.228.8: यह देखकर कि जिन लोकों को उसने तपस्या से वश में किया था, वे भी निष्फल हो गए, तब उसने धर्मराज के पास बैठे हुए देवताओं से पूछा।   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.228.8 
स लोकानफलान् दृष्ट्वा तपसा निर्जितानपि।
पप्रच्छ धर्मराजस्य समीपस्थान् दिवौकस:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर कि जिन लोकों को उसने तपस्या से वश में किया था, वे भी निष्फल हो गए, तब उसने धर्मराज के पास बैठे हुए देवताओं से पूछा।
 
Seeing that even the worlds which he had brought under control by austerity had proved fruitless, he asked the Gods sitting near Dharmaraja. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)