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स मार्गमाश्रितो राजन्नृषीणामूर्ध्वरेतसाम्।
स्वाध्यायवान् धर्मरतस्तपस्वी विजितेन्द्रिय:॥ ६॥
अनुवाद
राजा! वह ऋषियों के बताए मार्ग (ब्रह्मचर्य) का पालन करता था, वेदों के अध्ययन में लगा रहता था और धर्म के पालन में सदैव तत्पर रहता था। उसने अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में कर लिया था और सदैव तपस्या में लगा रहता था।॥6॥
King! He followed the path of the sages (celibacy) and was always engaged in the study of Vedas and was always ready to follow the religion. He had controlled all his senses and was always engaged in penance. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥