Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.228.4: वैशम्पायन कहते हैं - हे शत्रुओं का नाश करने वाले जनमेजय! मैं आपको वह कारण बताता हूँ कि अग्निदेव ने उस भयंकर अग्नि में भी शार्ङ्गों को क्यों नहीं जलाया तथा वह घटना किस प्रकार घटित हुई। सुनिए। | mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - हे शत्रुओं का नाश करने वाले जनमेजय! मैं आपको वह कारण बताता हूँ कि अग्निदेव ने उस भयंकर अग्नि में भी शार्ङ्गों को क्यों नहीं जलाया तथा वह घटना किस प्रकार घटित हुई। सुनिए।
Vaishmpayana says - O Janamejaya, destroyer of enemies! I am telling you the reason why Agnidev did not burn the Sharangas even in that terrible fire and the manner in which that incident occurred. Listen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥