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mahabharat 1.228.34: भगवान हव्यवाहन ने ‘बहुत अच्छा’ कहकर ऐसा करने की प्रतिज्ञा की और उस समय वे खाण्डव वन को जलाने के लिए प्रज्वलित हो उठे ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.228.34 
तथेति तत् प्रतिश्रुत्य भगवान् हव्यवाहन:।
खाण्डवे तेन कालेन प्रजज्वाल दिधक्षया॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भगवान हव्यवाहन ने ‘बहुत अच्छा’ कहकर ऐसा करने की प्रतिज्ञा की और उस समय वे खाण्डव वन को जलाने के लिए प्रज्वलित हो उठे ॥ 34॥
 
Saying 'Very good', Lord Havyavahana promised to do so and at that time he became ignited to burn the Khandava forest. ॥ 34॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि शार्ङ्गकोपाख्यानेऽष्टाविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय: ॥ २२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत मयदर्शनपर्वमें शार्ङ्गकोपाख्यानविषयक दो सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)