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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.228.33 
तमब्रवीन्मन्दपाल: प्राञ्जलिर्हव्यवाहनम्।
प्रदहन् खाण्डवं दावं मम पुत्रान् विसर्जय॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब मण्डपाल ने हाथ जोड़कर हव्यवाहन अग्नि से कहा - 'प्रभो! आप खाण्डववन को जलाते हुए मेरे पुत्रों की रक्षा कीजिए॥33॥
 
Then Mandapala folded his hands and said to the Havyavahana Agni – 'Lord! You save my sons while burning Khandavvan. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)