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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.228.3 
तदेतदद्‍भुतं ब्रह्मञ्छार्ङ्गकाणामनामयम्।
कीर्तयस्वाग्निसम्मर्दे कथं ते न विनाशिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! यह बड़े आश्चर्य की बात है कि वे शारंग उस भयंकर अग्नि से बच गए। कृपया मुझे बताइए कि वे कैसे नष्ट नहीं हुए?॥3॥
 
O Brahman! It is a matter of great wonder that those Sharangas survived that terrible fire unscathed. Please tell me, how did they not perish?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)