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mahabharat 1.228.27: अग्नि! आकाश में बिजली सहित जो बादल छाये रहते हैं, वे भी आपके ही स्वरूप कहे गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.228.27 
त्वामग्ने जलदानाहु: खे विषक्तान् सविद्युत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अग्नि! आकाश में बिजली सहित जो बादल छाये रहते हैं, वे भी आपके ही स्वरूप कहे गए हैं।
 
Agni! The clouds that gather in the sky along with lightning are also said to be your form. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)