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mahabharat 1.228.26-27h: हुताशन! आपके बिना यह सम्पूर्ण जगत तत्काल नष्ट हो जाएगा। आपको नमस्कार करके ब्राह्मण अपनी स्त्री और पुत्रों सहित अपने कर्मानुसार सनातन गति को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  1.228.26-27h 
त्वदृते हि जगत् कृत्स्नं सद्यो नश्येद् हुताशन।
तुभ्यं कृत्वा नमो विप्रा: स्वकर्मविजितां गतिम्॥ २६॥
गच्छन्ति सह पत्नीभि: सुतैरपि च शाश्वतीम्।
 
 
अनुवाद
हुताशन! आपके बिना यह सम्पूर्ण जगत तत्काल नष्ट हो जाएगा। आपको नमस्कार करके ब्राह्मण अपनी स्त्री और पुत्रों सहित अपने कर्मानुसार सनातन गति को प्राप्त होते हैं।
 
Hutashan! Without you the entire world will be destroyed immediately. By saluting you the Brahmins along with their wives and sons attain the eternal state according to their karma. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)