Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.228.24: पावक! आप समस्त प्राणियों के अंतरतम में रहस्यमय ढंग से विचरण करते हैं। विद्वान पुरुष आपको एक (अद्वितीय ब्रह्म) बताते हैं। फिर वे आपके त्रिगुणात्मक स्वरूप का वर्णन करते हैं - दिव्य, पार्थिव और जठराग्नि॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पावक! आप समस्त प्राणियों के अंतरतम में रहस्यमय ढंग से विचरण करते हैं। विद्वान पुरुष आपको एक (अद्वितीय ब्रह्म) बताते हैं। फिर वे आपके त्रिगुणात्मक स्वरूप का वर्णन करते हैं - दिव्य, पार्थिव और जठराग्नि॥ 24॥
Pavaka! You move in the innermost beings of all living beings in a mysterious manner. Learned men describe you as one (unique Brahman). Then they explain your threefold form as divine, terrestrial and gastric fire.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥