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mahabharat 1.228.22-23h: अग्निदेव का निश्चय जानकर तथा अपने पुत्रों की बाल्यावस्था का विचार करके ब्रह्मर्षि मण्डपाल भयभीत हो गए और महान लोकपाल अग्नि (देवतुल्य) की स्तुति करके उनसे अपने पुत्रों की रक्षा करने की प्रार्थना करने लगे॥22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  1.228.22-23h 
तं संकल्पं विदित्वाग्नेर्ज्ञात्वा पुत्रांश्च बालकान्।
सोऽभितुष्टाव विप्रर्षिर्ब्राह्मणो जातवेदसम्॥ २२॥
पुत्रान् प्रति वदन् भीतो लोकपालं महौजसम्।
 
 
अनुवाद
अग्निदेव का निश्चय जानकर तथा अपने पुत्रों की बाल्यावस्था का विचार करके ब्रह्मर्षि मण्डपाल भयभीत हो गए और महान लोकपाल अग्नि (देवतुल्य) की स्तुति करके उनसे अपने पुत्रों की रक्षा करने की प्रार्थना करने लगे॥22 1/2॥
 
Knowing the resolution of Agnidev and thinking about the childhood of his sons, Brahmarishi Mandapal got scared and started praising the great Lokpal Agni (like God), requesting him to protect his sons. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)