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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.228.21 
ततोऽग्निं खाण्डवं दग्धुमायान्तं दृष्टवानृषि:।
मन्दपालश्चरंस्तस्मिन् वने लपितया सह॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच ऋषि मंडपाल ने लपिता के साथ वन में भ्रमण करते हुए अग्निदेव को खाण्डव वन को जलाने के लिए आते देखा।
 
Meanwhile the sage Mandapala while roaming in the forest with Lapita saw the god Agni coming to burn the Khandava forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)