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mahabharat 1.228.2: विप्रवर! आपने अश्वसेन नाग और मयदानव के न जलने का कारण तो बता दिया; परन्तु शार्ङ्गकों के न जलने का कारण नहीं बताया॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.228.2 
अदाहे ह्यश्वसेनस्य दानवस्य मयस्य च।
कारणं कीर्तितं ब्रह्मञ्छार्ङ्गकाणां न कीर्तितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! आपने अश्वसेन नाग और मयदानव के न जलने का कारण तो बता दिया; परन्तु शार्ङ्गकों के न जलने का कारण नहीं बताया॥2॥
 
Vipravara! You have told the reason for the non-burning of Ashwasen serpent and Maydanava; But the reason for the non-burning of śarṅgakas is not stated. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)