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mahabharat 1.228.18-19h: भरत! जब महर्षि मंडपला अपने पिता के पास गए, तो वह स्त्री, जो अपने बच्चों के प्रति प्रेम से भरी हुई थी, बहुत चिंतित हो गई।   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  1.228.18-19h 
तस्मिन् गते महाभागे लपितां प्रति भारत॥ १८॥
अपत्यस्नेहसंयुक्ता जरिता बह्वचिन्तयत्।
 
 
अनुवाद
भरत! जब महर्षि मंडपला अपने पिता के पास गए, तो वह स्त्री, जो अपने बच्चों के प्रति प्रेम से भरी हुई थी, बहुत चिंतित हो गई।
 
Bharata! When the great sage Mandapala went to his father, the woman who was full of love for her children became very worried. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)