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mahabharat 1.228.13: अतः तुम्हारे ये लोक सन्तान के लिए आवृत हैं। अतः पहले सन्तान उत्पन्न करो, फिर अपने प्रचुर पुण्य लोकों का फल भोगो॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.228.13 
त इमे प्रसवस्यार्थे तव लोका: समावृता:।
प्रजायस्व ततो लोकानुपभोक्ष्यसि पुष्कलान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम्हारे ये लोक सन्तान के लिए आवृत हैं। अतः पहले सन्तान उत्पन्न करो, फिर अपने प्रचुर पुण्य लोकों का फल भोगो॥13॥
 
Therefore, these worlds of yours are covered for the sake of progeny. Therefore, first produce progeny, then enjoy the fruits of your abundant virtuous worlds.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)