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mahabharat 1.228.10: मैं उस लोक में जाकर उस कर्म को करूँगा जिसके लिए इस तप का फल छिपा है। आप लोग कृपा करके मुझे उसके विषय में बताएँ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 228: शार्ङ्गकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.228.10 
तत्राहं तत् करिष्यामि यदर्थमिदमावृतम्।
फलमेतस्य तपस: कथयध्वं दिवौकस:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं उस लोक में जाकर उस कर्म को करूँगा जिसके लिए इस तप का फल छिपा है। आप लोग कृपा करके मुझे उसके विषय में बताएँ॥10॥
 
I will go to the world for which the fruits of this penance are hidden and perform that act. You all please tell me about it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)