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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 227: देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  1.227.8-9h 
तत्रादृश्यन्त ते दैत्या: कृष्णचक्रविदारिता:॥ ८॥
वसारुधिरसम्पृक्ता: संध्यायामिव तोयदा:।
 
 
अनुवाद
कृष्ण के चक्र से छेदे गए राक्षस चर्बी और रक्त से ढँक गए और शाम के बादलों की तरह दिखाई देने लगे।
 
The demons pierced by Krishna's discus became covered in fat and blood and appeared like evening clouds. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)