Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.227.47: उस वन के जलते समय अग्नि ने अश्वसेन, मयासुर और शार्ङ्गक नामक चार पक्षियों को नहीं जलाया ॥4 7॥ | mahabharat अध्याय 1.227: देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस वन के जलते समय अग्नि ने अश्वसेन, मयासुर और शार्ङ्गक नामक चार पक्षियों को नहीं जलाया ॥4 7॥
While that forest was being burnt, the fire did not burn the snake Ashwasena, Mayasura and the four birds named Sharngaka. 4 7॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि मयदानवत्राणे सप्तविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत मयदर्शनपर्वमें मयदानवकी रक्षाविषयक दो सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥