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विद्याधरगणाश्चैव ये च तत्र वनौकस:।
न त्वर्जुनं महाबाहो नापि कृष्णं जनार्दनम्॥ ३३॥
निरीक्षितुं वै शक्नोति कश्चिद् योद्धुं कुत: पुन:।
अनुवाद
उस वन में रहने वाले विद्याधर जाति के लोगों की भी यही दशा थी। हे महाबली! उस समय कोई भी श्रीकृष्ण और अर्जुन की ओर देख भी नहीं सकता था, युद्ध करना तो दूर की बात थी।
The Vidyadhar caste people living in that forest were also in the same condition. O mighty one! At that time no one could even look at Shri Krishna and Arjun, let alone fight a battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥