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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 227: देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  1.227.27-28h 
न च स्म किंचिच्छक्नोति भूतं निश्चरितुं तत:॥ २७॥
संछिद्यमानमिषुभिरस्यता सव्यसाचिना।
 
 
अनुवाद
जब सव्यसाची अर्जुन बाण चला रहे थे, तब कोई भी प्राणी वहाँ से निकल नहीं सकता था, क्योंकि वे उसके बाणों से कट जाते थे।
 
When Savyasachi Arjuna was shooting his arrows, no living being could get out from there because they got cut by his arrows. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)