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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.225.8 
दग्धपक्षाक्षिचरणा विचेष्टन्तो महीतले।
तत्र तत्र स्म दृश्यन्ते विनश्यन्त: शरीरिण:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कई पक्षी ज़मीन पर पड़े दर्द से तड़प रहे थे क्योंकि उनके पंख, आँखें और पंजे जल गए थे। कई जगहों पर, मौत के कगार पर पहुँचे जानवर और जीव-जंतु दिखाई दे रहे थे।
 
Many birds were lying on the ground and were writhing in pain because their wings, eyes and claws were burnt. In many places, animals and creatures on the verge of death were visible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)