श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.225.4 
खाण्डवे दह्यमाने तु भूता: शतसहस्रश:।
उत्पेतुर्भैरवान् नादान् विनदन्त: समन्तत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब खाण्डव वन में आग फैल गई और वह भली-भाँति जलने लगा, उस समय करोड़ों प्राणी भयानक चीत्कार करते हुए सब दिशाओं में उछलने-कूदने और नाचने लगे॥4॥
 
When the fire spread in the Khandava forest and it began to burn well, at that time millions of creatures started jumping and dancing in all directions while making terrible shrieks. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)