Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.225.22: अग्नि की लपटों और जल की धाराओं के साथ मिलकर वन से धुआँ उठने लगा। चारों ओर बिजलियाँ चमकने लगीं और बादलों के गरजने की ध्वनि सर्वत्र गूँजने लगी। इस प्रकार खाण्डव वन की स्थिति अत्यंत भयावह हो गई। | mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्नि की लपटों और जल की धाराओं के साथ मिलकर वन से धुआँ उठने लगा। चारों ओर बिजलियाँ चमकने लगीं और बादलों के गरजने की ध्वनि सर्वत्र गूँजने लगी। इस प्रकार खाण्डव वन की स्थिति अत्यंत भयावह हो गई।
Smoke started rising from the forest when it was combined with the flames of fire and streams of water. Lightning started flashing everywhere and the sound of thundering of clouds echoed everywhere. In this way the condition of Khandava forest became very dreadful.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि खाण्डवदाहपर्वणि इन्द्रक्रोधे पञ्चविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत खाण्डवदाहपर्वमें इन्द्रकोपविषयक दो सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥