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mahabharat 1.225.20: लेकिन आग की तीव्रता के कारण वे धाराएँ वहाँ पहुँचने से पहले ही आकाश में सूख गईं। कोई भी धारा आग तक नहीं पहुँची।   |   mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.225.20 
असम्प्राप्तास्तु ता धारास्तेजसा जातवेदस:।
ख एव समशुष्यन्त न काश्चित् पावकं गता:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लेकिन आग की तीव्रता के कारण वे धाराएँ वहाँ पहुँचने से पहले ही आकाश में सूख गईं। कोई भी धारा आग तक नहीं पहुँची।
 
But due to the intensity of the fire, those streams dried up in the sky before reaching there. No stream reached the fire at all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)