श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.225.19 
ततोऽक्षमात्रा व्यसृजन् धारा: शतसहस्रश:।
चोदिता देवराजेन जलदा: खाण्डवं प्रति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भगवान इंद्र की प्रेरणा से बादलों ने खांडव वन पर रथ के धुरों के समान मोटी जल की असंख्य धाराएं बरसानी शुरू कर दीं।
 
Inspired by Lord Indra, the clouds began to pour down innumerable streams of water as thick as the axles of a chariot on the Khandava forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)