Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.225.17: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! देवताओं की यह बात सुनकर वृत्रासुर का संहार करने वाले इन्द्र स्वयं यह घटना देखकर खाण्डव वन को अग्नि के भय से मुक्त करने के लिए चले गये। | mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! देवताओं की यह बात सुनकर वृत्रासुर का संहार करने वाले इन्द्र स्वयं यह घटना देखकर खाण्डव वन को अग्नि के भय से मुक्त करने के लिए चले गये।
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing this from the gods, Indra, the destroyer of Vritraasura, seeing the incident himself went to free the Khandava forest from the fear of fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥