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mahabharat 1.225.15: उस ज्वाला से कुपित होकर संसार के सभी देवता और महर्षि आदि वासी महान दैत्यों के संहारक भगवान सहस्राक्ष इन्द्र के पास गए॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.225.15 
तेनार्चिषा सुसंतप्ता देवा: सर्षिपुरोगमा:।
ततो जग्मुर्महात्मान: सर्व एव दिवौकस:।
शतक्रतुं सहस्राक्षं देवेशमसुरार्दनम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस ज्वाला से कुपित होकर संसार के सभी देवता और महर्षि आदि वासी महान दैत्यों के संहारक भगवान सहस्राक्ष इन्द्र के पास गए॥15॥
 
Angered by that flame, all the gods and Maharshi etc. residents of the world went to Lord Sahasraksh Indra, the great destroyer of demons. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)