ते शराचितसर्वाङ्गा निनदन्तो महारवान्।
ऊर्ध्वमुत्पत्य वेगेन निपेतु: खाण्डवे पुन:॥ १२॥
अनुवाद
पहले तो पक्षी बड़े वेग से ऊपर की ओर उड़ते थे, परन्तु जब उनका सम्पूर्ण शरीर बाणों से बिंध जाता था, तब वे पुनः खाण्डव वन में गिरकर जोर-जोर से चीखते थे॥12॥
At first the birds would fly upwards with great speed, but after their entire body was pierced by arrows, they would fall down again in the Khandava forest, wailing loudly.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥