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mahabharat 1.225.11: अर्जुन ने अपने बाणों से अनेक उड़ते हुए पक्षियों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और उन्हें धधकती हुई अग्नि में फेंक दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.225.11 
कांश्चिदुत्पतत: पार्थ: शरै: संछिद्य खण्डश:।
पातयामास विहगान् प्रदीप्ते वसुरेतसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने अपने बाणों से अनेक उड़ते हुए पक्षियों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और उन्हें धधकती हुई अग्नि में फेंक दिया।
 
Arjuna cut many flying birds into pieces with his arrows and threw them into the blazing fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)