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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना
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श्लोक 5
श्लोक
1.224.5
कार्यं च सुमहत् पार्थो गाण्डीवेन करिष्यति।
चक्रेण वासुदेवश्च तन्ममाद्य प्रदीयताम्॥ ५॥
अनुवाद
'आज कुन्तीपुत्र अर्जुन गाण्डीव धनुष से तथा भगवान वासुदेव चक्र से मेरा महान कार्य सम्पन्न करेंगे; अतः आज तुम उन सबको मुझे दे दो।'
'Today Kunti's son Arjuna will accomplish my great task with the Gandiva bow and Lord Vasudeva with the Chakra; so give them all to me today.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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