Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.224.36: हे भरतश्रेष्ठ! उस वन को चारों ओर से अपनी ज्वालाओं से आवृत करके तथा उसके भीतर भी व्याप्त करके भगवान अग्निदेव मेघ की गर्जना के समान गम्भीर शब्द करके समस्त प्राणियों को थर्राने लगे। | mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतश्रेष्ठ! उस वन को चारों ओर से अपनी ज्वालाओं से आवृत करके तथा उसके भीतर भी व्याप्त करके भगवान अग्निदेव मेघ की गर्जना के समान गम्भीर शब्द करके समस्त प्राणियों को थर्राने लगे।
O best of the Bharatas! Having enveloped that forest in his flames from all sides and pervading its interior as well, the Lord Agni began to tremble all creatures by making a deep noise like the roar of a cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥