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mahabharat 1.224.35: सात ज्वलंत जिह्वाओं वाले अग्निदेव ने खाण्डव वन को चारों ओर से घेर लिया और उसे जलाना शुरू कर दिया, जिससे प्रलय जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया।   |   mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.224.35 
सर्वत: परिवार्याथ सप्तार्चिर्ज्वलनस्तथा।
ददाह खाण्डवं दावं युगान्तमिव दर्शयन्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सात ज्वलंत जिह्वाओं वाले अग्निदेव ने खाण्डव वन को चारों ओर से घेर लिया और उसे जलाना शुरू कर दिया, जिससे प्रलय जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया।
 
Having seven fiery tongues, Agni Deva surrounded the Khandava forest from all sides and began burning it, creating a scene like that of apocalypse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)