Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.224.34: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! श्रीकृष्ण और अर्जुन की यह बात सुनकर भगवान अग्नि ने तेजस्वी रूप धारण किया और खाण्डव वन को सब ओर से जलाने लगे॥34॥ | mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: स भगवान् दाशार्हेणार्जुनेन च।
तैजसं रूपमास्थाय दावं दग्धुं प्रचक्रमे॥ ३४॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! श्रीकृष्ण और अर्जुन की यह बात सुनकर भगवान अग्नि ने तेजस्वी रूप धारण किया और खाण्डव वन को सब ओर से जलाने लगे॥34॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! On hearing this from Shri Krishna and Arjun, Lord Agni took a bright form and started burning the Khandav forest from all sides. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥