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mahabharat 1.224.32: पावक! मैं भी इस गांडीव धनुष और इन दो विशाल अक्षय तरकशों को लेकर युद्ध में समस्त लोकों पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्सुक हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.224.32 
गाण्डीवं धनुरादाय तथाक्षय्ये महेषुधी।
अहमप्युत्सहे लोकान् विजेतुं युधि पावक॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पावक! मैं भी इस गांडीव धनुष और इन दो विशाल अक्षय तरकशों को लेकर युद्ध में समस्त लोकों पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्सुक हूँ।
 
Pavaka! I too am enthusiastic about conquering all the worlds in a war, taking up this Gandiva bow and these two large, inexhaustible quivers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)