Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.224.29-30: तदनन्तर अस्त्रविद्या के ज्ञाता और शस्त्रसज्जित अर्जुन और श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर अग्निदेव से कहा - 'प्रभो! अब हम दोनों रथ और ध्वजा से सुसज्जित होकर समस्त देवताओं और दानवों से भी युद्ध करने में समर्थ हो गये हैं; फिर तक्षक नाग का वज्र लेकर युद्ध करने के लिए तत्पर एकमात्र इन्द्र के साथ युद्ध करना क्या कोई बड़ी बात है?' 29-30॥ | mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर अस्त्रविद्या के ज्ञाता और शस्त्रसज्जित अर्जुन और श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर अग्निदेव से कहा - 'प्रभो! अब हम दोनों रथ और ध्वजा से सुसज्जित होकर समस्त देवताओं और दानवों से भी युद्ध करने में समर्थ हो गये हैं; फिर तक्षक नाग का वज्र लेकर युद्ध करने के लिए तत्पर एकमात्र इन्द्र के साथ युद्ध करना क्या कोई बड़ी बात है?' 29-30॥
After this, Arjun and Shri Krishna, knowledgeable in the field of weaponry and equipped with weapons, were pleased and said to Agnidev - 'Lord! Now both of us, equipped with chariot and flag, have become capable of fighting with all the gods and even demons; Then is it a big deal for Takshak Naga to fight with Indra, the only one willing to fight, with the thunderbolt?' 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥