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mahabharat 1.224.24-26: अग्निदेव द्वारा प्रदत्त उस प्रिय अस्त्र चक्र को पाकर भगवान श्रीकृष्ण भी उस समय सहायता करने में समर्थ हो गए। अग्निदेव ने उनसे कहा- 'मधुसूदन! इस चक्र से तुम युद्ध में मनुष्येत्तर प्राणियों को भी परास्त कर दोगे, इसमें संशय नहीं है। इससे तुम युद्ध में मनुष्यों, देवताओं, दानवों, भूतों, पिशाचों और नागों से भी अधिक शक्तिशाली होगे और निःसंदेह उन सबका नाश करने में श्रेष्ठ सिद्ध होगे॥ 24-26॥   |   mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 24-26
 
 
श्लोक  1.224.24-26 
आग्नेयमस्त्रं दयितं स च कल्योऽभवत् तदा।
अब्रवीत् पावकश्चैवमेतेन मधुसूदन॥ २४॥
अमानुषानपि रणे जेष्यसि त्वमसंशयम्।
अनेन तु मनुष्याणां देवानामपि चाहवे॥ २५॥
रक्ष:पिशाचदैत्यानां नागानां चाधिकस्तथा।
भविष्यसि न संदेह: प्रवरोऽपि निबर्हणे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव द्वारा प्रदत्त उस प्रिय अस्त्र चक्र को पाकर भगवान श्रीकृष्ण भी उस समय सहायता करने में समर्थ हो गए। अग्निदेव ने उनसे कहा- 'मधुसूदन! इस चक्र से तुम युद्ध में मनुष्येत्तर प्राणियों को भी परास्त कर दोगे, इसमें संशय नहीं है। इससे तुम युद्ध में मनुष्यों, देवताओं, दानवों, भूतों, पिशाचों और नागों से भी अधिक शक्तिशाली होगे और निःसंदेह उन सबका नाश करने में श्रेष्ठ सिद्ध होगे॥ 24-26॥
 
Having received that favourite weapon chakra given by Agni, Lord Krishna also became capable of helping at that time. Agnidev said to him- 'Madhusudana! With this chakra you will defeat even the non-human creatures in the war, there is no doubt about it. With this you will be more powerful than humans, gods, demons, ghosts, devils and serpents in the war and will undoubtedly prove to be the best in destroying them all.॥ 24-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)