Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.224.22-23: उस रथ, धनुष और अक्षय तरकश को पाकर कुन्तीनन्दन अर्जुन अत्यन्त प्रसन्न हुए और अग्निदेव की सहायता करने में समर्थ हुए। तत्पश्चात् पावकने भगवान श्रीकृष्ण को एक चक्र दिया, जिसका मध्य भाग वज्र के समान था। 22-23॥ | mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस रथ, धनुष और अक्षय तरकश को पाकर कुन्तीनन्दन अर्जुन अत्यन्त प्रसन्न हुए और अग्निदेव की सहायता करने में समर्थ हुए। तत्पश्चात् पावकने भगवान श्रीकृष्ण को एक चक्र दिया, जिसका मध्य भाग वज्र के समान था। 22-23॥
After getting that chariot, bow and inexhaustible quiver, Kuntinandan Arjun became very happy and was able to help Agni. Thereafter, Pavakne gave a disc to Lord Krishna, the middle part of which was like a thunderbolt. 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥