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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.224.14 
नवमेघप्रतीकाशं ज्वलन्तमिव च श्रिया।
आश्रितौ तं रथश्रेष्ठं शक्रायुधसमावुभौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह रथ नवीन मेघ के समान प्रकट हो रहा था और अपनी दिव्य शोभा से प्रकाशित हो रहा था। इन्द्रधनुष के समान चमक वाले श्रीकृष्ण और अर्जुन उस उत्तम रथ के पास गए।
 
That chariot appeared like a new cloud and was blazing with its divine splendor. Shri Krishna and Arjuna, whose brilliance was like that of a rainbow, went near that excellent chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)