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mahabharat 1.224.11: उनकी प्रभा श्वेत मेघों के समान थी। वेग में वे मन और वायु के समान थे। वह रथ समस्त आवश्यक वस्तुओं से सुसज्जित था और देवताओं तथा दानवों के लिए भी अजेय था।   |   mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.224.11 
पाण्डुराभ्रप्रतीकाशैर्मनोवायुसमैर्जवे ।
सर्वोपकरणैर्युक्तमजय्यं देवदानवै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनकी प्रभा श्वेत मेघों के समान थी। वेग में वे मन और वायु के समान थे। वह रथ समस्त आवश्यक वस्तुओं से सुसज्जित था और देवताओं तथा दानवों के लिए भी अजेय था।
 
Their brilliance looked like that of white clouds. In speed they were equal to the mind and the wind. That chariot was equipped with all the essential items and was invincible even for the gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)