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mahabharat 1.223.4: 'हव्यावाहन! उस समय नर और नारायण तुम्हारे सहायक होंगे। उनके साथ रहकर तुम उस वन को जला सकोगे।'॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.223.4 
भविष्यत: सहायौ ते नरनारायणौ तदा।
ताभ्यां त्वं सहितो दावं धक्ष्यसे हव्यवाहन॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'हव्यावाहन! उस समय नर और नारायण तुम्हारे सहायक होंगे। उनके साथ रहकर तुम उस वन को जला सकोगे।'॥4॥
 
'Havyaavaahan! At that time Nara and Narayana will be your helpers. By staying with them you will be able to burn that forest.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)