Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.223.3: 'अनघ! मैंने खाण्डव वन को जलाने का उपाय खोज लिया है; किन्तु उसके लिए तुम्हें कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी होगी। अनघ! इसके बाद तुम खाण्डव वन को जला सकोगे।' | mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपाय: परिदृष्टो मे यथा त्वं धक्ष्यसेऽनघ।
कालं च कंचित् क्षमतां ततस्त्वं धक्ष्यसेऽनल॥ ३॥
अनुवाद
'अनघ! मैंने खाण्डव वन को जलाने का उपाय खोज लिया है; किन्तु उसके लिए तुम्हें कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी होगी। अनघ! इसके बाद तुम खाण्डव वन को जला सकोगे।'
'Anagh! I have figured out the way by which you will burn the Khandava forest; but for that you will have to wait for some time. Anal! After this you will be able to burn the Khandava forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥