हे अग्निदेव! हम अपने प्रयत्नों से जो भी कार्य हो सके, उसे करने के लिए तैयार हैं; परंतु आप कृपा करके इसके लिए पर्याप्त साधन की व्यवस्था करें ॥ 21॥
O Lord Agnidev! We are ready to do whatever work can be done through our efforts; but you should kindly arrange for adequate resources for this. ॥ 21॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि खाण्डवदाहपर्वणि अर्जुनाग्निसंवादे त्रयोविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत खाण्डवदाहपर्वमें अर्जुन-अग्निसंवादविषयक दो सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥