श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.223.20 
उपायं कर्मसिद्धौ च भगवन् वक्तुमर्हसि।
निवारयेयं येनेन्द्रं वर्षमाणं महावने॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इस कार्य को सिद्ध करने के लिए जो भी उपाय संभव हो, कृपया मुझे बताइए, जिससे मैं इंद्र को इस महान वन में जल बरसाने से रोक सकूँ॥20॥
 
Lord! Please tell me whatever solution is possible to accomplish this task, so that I can stop Indra from raining water in this great forest. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)