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mahabharat 1.223.2: वहाँ उसने ब्रह्माजी से सब बातें ठीक-ठीक कह सुनाईं। तब भगवान ब्रह्माजी ने कुछ देर विचार करके उससे कहा -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.223.2 
तच्च सर्वं यथान्यायं ब्रह्मणे संन्यवेदयत्।
उवाच चैनं भगवान् मुहूर्तं स विचिन्त्य तु॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उसने ब्रह्माजी से सब बातें ठीक-ठीक कह सुनाईं। तब भगवान ब्रह्माजी ने कुछ देर विचार करके उससे कहा -॥2॥
 
There he narrated everything to Brahmaji in a proper manner. Then Lord Brahmaji thought for a while and said to him -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)