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mahabharat 1.223.18-19: मैं वायु के समान वेगवान श्वेत दिव्य अश्व, मेघ के समान गर्जना करने वाला तथा सूर्य के समान तेजस्वी रथ चाहता हूँ। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के बल और पराक्रम के अनुसार उनके पास भी ऐसा कोई अस्त्र नहीं है, जिससे वे युद्ध में सर्पों और पिशाचों का वध कर सकें। 18-19॥   |   mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  1.223.18-19 
अश्वांश्च दिव्यानिच्छेयं पाण्डुरान् वातरंहस:।
रथं च मेघनिर्घोषं सूर्यप्रतिमतेजसम्॥ १८॥
तथा कृष्णस्य वीर्येण नायुधं विद्यते समम्।
येन नागान् पिशाचांश्च निहन्यान्माधवो रणे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मैं वायु के समान वेगवान श्वेत दिव्य अश्व, मेघ के समान गर्जना करने वाला तथा सूर्य के समान तेजस्वी रथ चाहता हूँ। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के बल और पराक्रम के अनुसार उनके पास भी ऐसा कोई अस्त्र नहीं है, जिससे वे युद्ध में सर्पों और पिशाचों का वध कर सकें। 18-19॥
 
I want a white divine horse as fast as the wind and a chariot as loud as the clouds and as bright as the sun. Similarly, according to the strength and bravery of Lord Shri Krishna, he also does not have any weapon with which he can kill snakes and vampires in the war. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)