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mahabharat 1.223.15: अर्जुन बोले - हे प्रभु! मेरे पास अनेक दिव्य एवं उत्तम अस्त्र हैं, जिनसे मैं एक ही नहीं, अपितु अनेक वज्रधारियों से युद्ध कर सकता हूँ॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.223.15 
अर्जुन उवाच
उत्तमास्त्राणि मे सन्ति दिव्यानि च बहूनि च।
यैरहं शक्नुयां योद्धुमपि वज्रधरान् बहून्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे प्रभु! मेरे पास अनेक दिव्य एवं उत्तम अस्त्र हैं, जिनसे मैं एक ही नहीं, अपितु अनेक वज्रधारियों से युद्ध कर सकता हूँ॥ 15॥
 
Arjun said - O Lord! I have many divine and excellent weapons with which I can fight not only with one but with many thunderbolt wielders.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)