Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.223.12-14: हे राजनश्रेष्ठ! यह सुनकर हव्यवाहन तुरन्त ही श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास आये और एक कार्य प्रस्तावित किया, जिसे मैं पहले ही आपसे कह चुका हूँ। जनमेजय! अग्निदेव की यह बात सुनकर अर्जुन ने जातवेद अग्निदेव से, जो समय की आवश्यकता के अनुसार इन्द्र की इच्छा के विरुद्ध खाण्डव वन को जला देना चाहते थे, यह बात कही। 12-14। | mahabharat अध्याय 1.223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजनश्रेष्ठ! यह सुनकर हव्यवाहन तुरन्त ही श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास आये और एक कार्य प्रस्तावित किया, जिसे मैं पहले ही आपसे कह चुका हूँ। जनमेजय! अग्निदेव की यह बात सुनकर अर्जुन ने जातवेद अग्निदेव से, जो समय की आवश्यकता के अनुसार इन्द्र की इच्छा के विरुद्ध खाण्डव वन को जला देना चाहते थे, यह बात कही। 12-14।
O best of kings! On hearing this, Havyavahan immediately came to Shri Krishna and Arjuna and proposed a task which I have already told you. Janamejaya! On hearing this statement of Agni, Arjuna said this to Jaatveda Agni, who wanted to burn the Khandava forest against the wishes of Indra, as per the need of the hour. 12-14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥