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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना
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श्लोक 10
श्लोक
1.223.10
तौ त्वं याचस्व साहाय्ये दाहार्थं खाण्डवस्य च।
ततो धक्ष्यसि तं दावं रक्षितं त्रिदशैरपि॥ १०॥
अनुवाद
‘खाण्डव वन को जलाने में उन दोनों से सहायता मांगो। तब तुम इन्द्र आदि देवताओं द्वारा रक्षित होने पर भी उस वन को जला सकोगे।॥10॥
‘Ask them both for help in burning the Khandava forest. Then you will be able to burn the forest even if it is protected by Indra and other gods.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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