Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.222.8: उस तक्षक नाग के कारण ही वे यहाँ रहने वाले अन्य अनेक प्राणियों की रक्षा करते हैं, अतः इन्द्र के प्रभाव से मैं इस वन को जलाने में समर्थ नहीं हूँ। परन्तु इसे जलाने की इच्छा मुझमें सदैव बनी रहती है॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.222.8 
तत्र भूतान्यनेकानि रक्षतेऽस्य प्रसङ्गत:।
तं दिधक्षुर्न शक्नोमि दग्धुं शक्रस्य तेजसा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस तक्षक नाग के कारण ही वे यहाँ रहने वाले अन्य अनेक प्राणियों की रक्षा करते हैं, अतः इन्द्र के प्रभाव से मैं इस वन को जलाने में समर्थ नहीं हूँ। परन्तु इसे जलाने की इच्छा मुझमें सदैव बनी रहती है॥8॥
 
Because of that Takshak snake, they protect many other creatures living here, therefore due to the influence of Indra I am not able to burn this forest. But I always have the desire to burn it. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)