Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.222.77-78: 'तुम शीघ्र ही उस वन को जला डालने जाओ। तभी तुम इस लज्जा से मुक्त हो सकोगे।' परमब्रह्म के मुख से ये वचन सुनकर अग्निदेव बड़े वेग से वहाँ पहुँचे। खाण्डव वन में पहुँचकर, अपने महाबल का आश्रय लेकर तथा वायु का सहारा पाकर, कुपित अग्निदेव सहसा प्रज्वलित हो उठे। 77-78। | mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम शीघ्र ही उस वन को जला डालने जाओ। तभी तुम इस लज्जा से मुक्त हो सकोगे।' परमब्रह्म के मुख से ये वचन सुनकर अग्निदेव बड़े वेग से वहाँ पहुँचे। खाण्डव वन में पहुँचकर, अपने महाबल का आश्रय लेकर तथा वायु का सहारा पाकर, कुपित अग्निदेव सहसा प्रज्वलित हो उठे। 77-78।
'You should go quickly to burn that forest. Only then will you be able to get rid of this shame.' Hearing these words from the mouth of the supreme Brahma, Agnidev rushed there with great speed. Reaching Khandava forest, taking shelter of his great strength and getting support from the wind, the enraged Agnidev suddenly became inflamed. 77-78.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥