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mahabharat 1.222.39: राजा श्वेताकी दोनों भुजाएं ऊपर उठाकर सूर्य की ओर देखते हुए, एकाग्रचित्त और स्थिर मन से छः महीने तक खड़े रहे।   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.222.39 
ऊर्ध्वबाहुस्त्वनिमिषस्तिष्ठन् स्थाणुरिवाचल:।
षण्मासानभवद् राजा श्वेतकि: सुसमाहित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
राजा श्वेताकी दोनों भुजाएं ऊपर उठाकर सूर्य की ओर देखते हुए, एकाग्रचित्त और स्थिर मन से छः महीने तक खड़े रहे।
 
With both his arms raised and gazing at the Sun, King Swetaaki stood with his mind focused and motionless like a stump for six months.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)